राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी—साइबर ठग चोरी किए गए दस्तावेज और बायोमेट्रिक डेटा का कर रहे दुरुपयोग, आमजन संचार साथी पोर्टल पर जांचें अपने नाम से जारी सभी मोबाइल कनेक्शन
जयपुर/बालोतरा 18 सितम्बर। महानिदेशक पुलिस राजस्थान राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार राजस्थान पुलिस द्वारा साइबर अपराधों की रोकथाम के साथ-साथ आमजन को साइबर ठगी के नए तौर-तरीकों के प्रति लगातार जागरूक किया जा रहा है। इसी क्रम में राजस्थान पुलिस की R4C साइबर क्राइम आउटरीच, अनुसंधान एवं नवाचार शाखा ने आमजन के दस्तावेजों और बायोमेट्रिक डेटा के दुरुपयोग से जारी होने वाले फर्जी सिम कार्ड के संबंध में एडवाइजरी जारी की है।
एडीजी साइबर क्राइम वी.के. सिंह ने आमजन से अपील की है कि वे समय-समय पर यह अवश्य जांचें कि उनके नाम पर कितने मोबाइल कनेक्शन जारी हैं। साइबर ठग चोरी किए गए पहचान दस्तावेजों, फोटो अथवा बायोमेट्रिक डेटा का दुरुपयोग कर कुछ अनधिकृत अथवा भ्रष्ट सिम विक्रेताओं की मिलीभगत से व्यक्ति की जानकारी के बिना उसके नाम पर अतिरिक्त सिम कार्ड जारी करवा सकते हैं। बाद में इन सिम का इस्तेमाल साइबर अपराध, फर्जी बैंक खातों और ऑनलाइन ठगी में किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में बिना जानकारी के भी संबंधित व्यक्ति जांच के दायरे में आ सकता है।
इस तरह दिया जाता है वारदात को अंजाम:
साइबर ठग फर्जी तरीके से ई-केवाईसी करवाकर किसी व्यक्ति के नाम पर अतिरिक्त सिम कार्ड जारी करवा सकते हैं। इसके बाद इस सिम का इस्तेमाल ऑनलाइन भुगतान एप्लीकेशन और फर्जी बैंक खातों को संचालित करने में किया जाता है। ठगी की रकम इन खातों में भेजकर उसे आगे स्थानांतरित किया जाता है, जिससे धनराशि के वास्तविक स्रोत तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
साइबर ठग बैंक स्टेटमेंट, आरबीआई अनुपालन, आयकर विभाग या कस्टम विभाग के नाम पर ई-मेल अथवा संदेश भेजकर ZIP फाइल भी डाउनलोड करवा सकते हैं। ऐसी संदिग्ध फाइल खोलने पर मोबाइल या कंप्यूटर मैलवेयर से संक्रमित हो सकता है। इसके जरिए चैट, पासवर्ड, महत्वपूर्ण दस्तावेज और अन्य संवेदनशील डेटा चोरी किया जा सकता है। चोरी किए गए डेटा का इस्तेमाल आगे फर्जी कॉल, संदेश अथवा अन्य साइबर अपराधों में किया जा सकता है।
घर बैठे ऐसे जांचें—आपके नाम पर कितने सिम हैं :
आमजन अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी भारत सरकार के आधिकारिक संचार साथी पोर्टल से प्राप्त कर सकते हैं।
संचार साथी पोर्टल खोलें:
- “Know Mobile Connections in Your Name” (TAF-COP) विकल्प पर जाएं।
- अपना मोबाइल नंबर दर्ज कर ओटीपी से सत्यापन करें।
- स्क्रीन पर आपके नाम से जारी मोबाइल कनेक्शनों की सूची प्रदर्शित होगी।
- सूची में प्रत्येक नंबर की सावधानीपूर्वक जांच करें।
- कोई ऐसा नंबर दिखाई दे जो आपका नहीं है या जिसकी अब आवश्यकता नहीं है, तो पोर्टल के माध्यम से उसे Report/Disconnect करें।
अनजान नंबर मिले तो तुरंत उठाएं ये कदम :
यदि आपके नाम पर ऐसा मोबाइल नंबर जारी मिला है जिसका आपने कभी उपयोग नहीं किया, तो तत्काल संचार साथी पोर्टल पर उसकी रिपोर्ट करें। साथ ही संबंधित टेलीकॉम कंपनी के ग्राहक सेवा केंद्र से संपर्क कर इसकी जानकारी दें।
यदि मामला साइबर धोखाधड़ी से जुड़ा है तो संबंधित एसएमएस, स्क्रीनशॉट, ई-मेल, चैट और लेन-देन से संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। ये सामग्री जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकती है।
सिम और केवाईसी के दौरान बरतें ये सावधानियां:
एडीजी साइबर क्राइम वी.के. सिंह ने आमजन को सलाह दी है कि-
- सिम कार्ड केवल अधिकृत टेलीकॉम आउटलेट से ही खरीदें।
- केवाईसी अथवा सत्यापन के दौरान अपने मोबाइल फोन का नियंत्रण किसी अनजान व्यक्ति को न दें।
- बिना स्पष्ट कारण बार-बार बायोमेट्रिक सत्यापन कराने से बचें।
- ओटीपी, पिन और अन्य गोपनीय जानकारी किसी से साझा न करें।
- आधार, पैन अथवा अन्य पहचान दस्तावेज अनजान व्यक्तियों के साथ साझा न करें।
- समय-समय पर मोबाइल और एसएमएस अलर्ट की जांच करते रहें।
- सिम और केवाईसी से संबंधित दस्तावेज एवं रसीद सुरक्षित रखें।
- किसी अन्य व्यक्ति के इस्तेमाल के लिए अपने नाम पर कभी भी सिम कार्ड जारी न करवाएं।
साइबर ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत :
यदि आपके नाम पर फर्जी सिम जारी होने, दस्तावेजों के दुरुपयोग अथवा साइबर ठगी का संदेह हो तो तत्काल निकटतम पुलिस थाने या साइबर पुलिस थाने में सूचना दें।
साइबर अपराध की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी की जा सकती है। आर्थिक साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें।
साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल: "cybercrime.gov.in" (https://reference-url-citation.invalid/0)
साइबर हेल्पडेस्क: 9256001930 / 9257510100
राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की नियमित जांच करें और किसी भी अनजान नंबर की जानकारी मिलने पर तत्काल रिपोर्ट करें। सतर्कता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है।
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