ग्रीनमैन हर साल कम से कम 3 नए जलकुंड बनाने का लक्ष्य लेकर लगातार काम कर रहे हैं
पादरू. पश्चिमी राजस्थान के तपते रेगिस्तान में, जहां इंसानों के लिए पानी जुटाना भी बड़ी चुनौती है, वहीं बेजुबान जीवों के लिए पानी की व्यवस्था करना किसी तपस्या से कम नहीं। ऐसे कठिन हालात में पिछले 15 वर्षों से लगातार सेवा कार्य कर रहे ग्रीनमैन नरपतसिंह लंगेरा पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव सेवा का प्रेरणादायक उदाहरण बन चुके हैं।
ग्रीनमैन नरपतसिंह ने अब तक 2.5 लाख से अधिक पौधे लगाकर हरियाली की अनोखी मिसाल पेश की है। उनके द्वारा विकसित विश्व की सबसे बड़ी पीपल वाटिका इस अभियान की खास पहचान बन चुकी है, जो रेगिस्तान में हरियाली का संदेश दे रही है।
अब उनका यह प्रयास एक नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। भीषण गर्मी और जल संकट को देखते हुए उन्होंने वन्यजीवों के लिए पानी की स्थायी व्यवस्था का संकल्प लिया। इसी कड़ी में अब तक बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर और बालोतरा क्षेत्रों में 10 जलकुंडों का निर्माण किया जा चुका है।
इन जलकुंडों के माध्यम से हर दिन हजारों पक्षी और वन्यजीव अपनी प्यास बुझा रहे हैं। खास बात यह है कि ग्रीनमैन हर साल कम से कम 3 नए जलकुंड बनाने का लक्ष्य लेकर लगातार काम कर रहे हैं। वर्तमान में 11वां जलकुंड भुका थानसिंह क्षेत्र में निर्माणाधीन है।
भीषण गर्मी के इस दौर में ये जलकुंड वन्यजीवों के लिए जीवनरेखा साबित हो रहे हैं। इस अभियान को स्थानीय लोगों, समाजसेवियों और पर्यावरण प्रेमियों का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है।
ग्रीनमैन नरपतसिंह कहते हैं—
“अगर हर व्यक्ति थोड़ा-थोड़ा सहयोग करे, तो रेगिस्तान में भी कोई जीव प्यासा नहीं रहेगा।”
Comments
Post a Comment